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खाली पड़े रिजर्व सिलेंडर को बदलना भूले अस्पताल कर्मचारी, उखड़ने लगी थीं 125 मरीजों की सांसें


बीकानेर (अनुराग हर्ष)29 मिनट पहले

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ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए एक लाइन के 20 सिलेंडर रहते हैं। एक लाइन में सप्लाई खत्म होती है तो दूसरी लाइन तत्काल चालू कर दी जाती है। लेकिन यहां स्टाफ ने जो वैकल्पिक लाइन के सिलेंडर पहले से खाली हो चुके थे, उन्हें बदला ही नहीं था।

  • आधी रात को 30 मिनट तक ऑक्सीजन प्रेशर कम होने से सांसत में रही थी सवा सौ की जान
  • अस्पताल प्रशासन मामले को रफा दफा करने में जुटा, कलेक्टर ने रिपेार्ट मांगी

बीकानेर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में भर्ती 125 मरीजों की ऑक्सीजन प्रेशर घटने से जान खतरे में पड़ने के मामले में स्टाफ की लापरवाही उजागर हुई है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि अस्पताल में दो लाइन में से एक लाइन के सिलेंडर पहले से खाली थे। जब दूसरी के भी खत्म हो गए तब पता चला। इस कारण 30 मिनट तक आक्सीजन सप्लाई घट गई। अस्पताल प्रशासन इस मामूली जम्प बता रहा है।

ऑक्सीजन की सप्लाई के लिए एक लाइन के 20 सिलेंडर रहते हैं। एक लाइन में सप्लाई खत्म होती है तो दूसरी लाइन तत्काल चालू कर दी जाती है। लेकिन यहां स्टाफ ने जो वैकल्पिक लाइन के सिलेंडर पहले से खाली हो चुके थे, उन्हें बदला ही नहीं था। ऐसे में चालू सप्लाई लाइन के सिलेंडर खत्म हो गए तब चालू करने पर पता चला कि वो भी खाली हैं। ताबड़तोड़ स्टाॅक से सिलेंडर बुलवाकर व्यवस्था बनाई गई लेकिन इसमें 30 मिनट लग गए।

इस पूरे मामले पर पानी डालने की कोशिश में जुटे पीबीएम अस्पताल प्रशासन इसे सामान्य घटनाक्रम बता रहा है, वहीं कलक्टर ने इस बारे अस्पताल अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है।

आधी रात को हल्ला मचाया तब हुआ इंतजाम
जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात करीब 2.50 बजे रोगियों को सांस लेने में दिक्कत आई तो परिजनों ने ऑक्सीजन प्रेशर चेक किया। जो लगातार कम होता जा रहा था। इस दौरान वहां उपस्थित रोगियों के परिजन जो स्वयं पॉजिटिव होने के कारण भर्ती है, उन्होंने हल्ला मचाया। इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। बाद में ऑक्सीजन आपूर्ति की जगह पहुंचकर वहां लोगों से उलझ गए। देर रात एक वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र वर्मा भी मौके पर पहुंचे। तब जाकर ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू हो सकी।

तीन गंभीर रोगी चपेट में, नहीं चले वैकल्पिक सिलेंडर
सूत्रों के अनुसार आईसीयू में उस समय 30 रोगी भर्ती थे। ऑक्सीजन प्रेशर कम होने से तीन की हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई। तब वैकल्पिक तौर पर लगाये गए सिलेंडर लगाने का प्रयास हुआ। बताया जाता है यह वैकल्पिक सिलेंडर भी उपस्थित स्टॉफ नहीं लगा सका। बाद में रोगियों के परिजन वहां पहुंचे जहां से आपूर्ति होती है। हालांकि सुबह होते होते एक कोविड रोगी की मौत हो गई, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मौत का कारण ऑक्सीजन प्रेशर कम होना था या फिर पहले से उसकी स्थिति गंभीर थी।

‘हाइपोक्सिया’ से हो सकती थी मरीज की मौत
वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि पहले से ऑक्सीजन पर चल रहे रोगी को अगर कुछ देर के लिए ऑक्सीजन नहीं मिले या फिर कम प्रेशर के साथ मिले तो उसे ‘हाइपोक्सिया’ हो जाता है। इसका आशय है कि मस्तिष्क में रक्त का संचार संबंध टूट जाता है। यह मौत का कारण बनता है।

दो लाइन एक साथ, वैकल्पिक प्रबंध सही नहीं
सुपर स्पेशलिटी सेंटर में ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने की दो लाइनें है। एक लाइन में एक साथ बीस सिलेंडर लगाए जाते हैं। जैसे ही एक लाइन के सिलेंडर की ऑक्सीजन खत्म होती है। ऑटोमेटिक दूसरी लाइन शुरू हो जाती है। बताया जाता है कि शुक्रवार रात सिलेंडर लगाने वाले कार्मिकों की आपसी कहासुनी चल रही थी और इस दौरान दूसरी लाइन का सिलेंडर लगा ही नहीं। इसी कारण प्रेशर लगातार कम होता चला गया।

एक दिन में एक हजार सिलेंडर
​​​​​​​दरअसल, पीबीएम अस्पताल के चार विभागों में ऑक्सीजन देने की व्यवस्था चल रही है। इसमें सुपर स्पेशलिटी सेंटर (कोविड अस्पताल), मेटरनिटी सेंटर, टीबी क्लिनिक, मेडिकल आईसीयू व पोस्ट कोविड आईसीयू में ऑक्सीजन दी जा रही है। दिनभर में पीबीएम के सभी विभागों में एक हजार से अधिक सिलेंडर की खपत हो रही है, जो अस्पताल की स्थापना के बाद से अब तक की सर्वाधिक खपत है।

कलक्टर की पड़ताल, अब दे रहे सफाई
सुपर स्पेशलिटी सेंटर में चल रही इस गड़बड़ी के बारे में पता चलते ही जिला कलक्टर नमित मेहता ने अस्पताल प्रबंधन से रिपोर्ट मांग ली। इसके बाद अस्पताल प्रशासन में हडकंप मच गया। तुरत फुरत में यह बताया गया कि महज दो मिनट का एक ‘जम्प’ आया था, जिसे तुरंत नियंत्रित कर लिया गया।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. सलीम से भास्कर संवाददाता की सीधी बात

प्रश्न : कोविड अस्पताल रात को ऑक्सीजन प्रेशर कम क्यों हो गया?
अधीक्षक : कोई बड़ा मामला नहीं है, सिर्फ दो मिनट के लिए गड़बड़ी हुई थी। हमने समय रहते स्थिति संभाल ली।

प्रश्न : बताया जा रहा है कि आधा घंटे तक प्रेशर कम रहा?
अधीक्षक : कोई आधा घंटा क्यों एक घंटा भी कह सकता है, लेकिन हकीकत में सिर्फ दो मिनट का जम्प था।

प्रश्न : आपने इस मामले की जांच करवा रहे हैं?
अधीक्षक : मैं जांच करवा चुका हूं, इसके बाद ही आपको बता रहा हूं कि दो मिनट के लिए ही गड़बड़ हुई थी।

प्रश्न : क्या जिले में ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी है।
अधीक्षक : बिल्कुल नहीं है हमारे पास अभी इन स्टॉक 1600 सिलेंडर उपलब्ध है। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।

मरीज ने खारिज किया अस्पताल प्रबंधन का दावा
करीब 25 से 30 मिनट तक ऑक्सीजन प्रेशर कम रहा था। हम लोगों ने मौके पर पहुंचकर ऑक्सीजन के सिलेंडर सही करवाये। दो मिनट की बात गलत बताई जा रही है। यह पहली बार नहीं हुआ, बल्कि पहले भी दो बार ऐसा हो चुका है। कल रात समय पर हम लोग सक्रिय नहीं होते तो कई लोगों का दम टूट सकता था। -रोगी के परिजन (नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते)



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Muzaffar SHEIKHhttps://currentnewsinhindi.com
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