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गुरुद्वारा बुढ़ाजोहड़ में गुरुग्रंथ साहिब से 20 फीट की दूरी पर नवा रहे शीश, एक बारी में 50 श्रद्धालुओं को ही दे रहे प्रवेश


श्रीगंगानगर9 मिनट पहले

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  • राजस्थान सिख समाज प्रदेशभर के गुरुद्वारों में सजगता से करा रहा गाइडलाइन की पालना, संगत हो रही निहाल

काेराेना काल के अनलॉक-4 के बाद से प्रदेशभर में धार्मिक स्थलाें पर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हाे गया है। प्रदेशभर में 700 गुरुद्वारे कोविड-19 की गाइडलाइन की पूरी पालना के साथ खुल चुके हैं। इन सभी गुरुद्वारों के मुख्य द्वार पर थर्मल स्कैनिंग, हैंड सेनेटाइज की व्यवस्था है।

गुरुद्वारे में मास्क और फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ ही प्रवेश दिया जा रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक शहीद नगर गुरुद्वारा बुढ़ाजोहड़ साहिब में संगत दर्शन करने के लिए पहुंच रही है। गुरुद्वारा के प्रधान बलकरण सिंह बराड़ ने बताया कि गुरुद्वारा में काेराेना गाइडलाइन की पालना करते हुए गुरुग्रंथ साहिब से 20 फीट की दूरी बनाकर शीश नवा रही है।

दरबार साहिब में एक बारी में केवल 50 श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है। हर रोज सैकड़ों लोगों को लंगर छकाया जाता है। ग्लव्ज पहनकर बिना छुए ही कड़ा प्रसाद बांटा जा रहा है। यहांं यात्रियों के लिए निशुल्क 200 कमरों का प्रबंध है। संगत के लिए 24 घंटे लंगर उपलब्ध है गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधन में इलाके की साध संगत व देश-विदेश की साध संगत का विशेष योगदान रहता है।

कोरोना काल में रोज 4 हजार लोगों को मुहैया कराया भोजन
गुरुद्वारा बुढ़ाजोहड़ साहब प्रबंध कमेटी व अंधविद्यालय श्रीगंगानगर के संस्थापक स्वामी ब्रह्मदेव महाराज गुरुद्वारा सिंह सभा श्रीगंगानगर के प्रधान सरदार जितेंद्र पाल सिंह कोचर 11 जी के बाबा गुरु साहब सिंह व इलाके की संगत ने जरूरतमंदों को करीब 1 हजार राशन किट का वितरण किया। हर रोज 4 हजार लोगों को दो माह तक भोजन उपलब्ध करवाया गया।

पेनोरामा में साकार हुआ इतिहास
गुरुद्वारा बुड्ढा साहब में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की ओर से ऐतिहासिक पेनोरमा बनाया। गुरुद्वारा बुढ़ाजोहड़ साहिब व 10 गुरुद्वारा गुरु साहिबान के जीवन का इतिहास बताया गया है। वर्तमान सरकार ने करीबन 10 करोड़ रुपए की लागत से गुरुद्वारे के विकास का प्रोजेक्ट तैयार करवाया है।

गुरुद्वारे का इतिहास
श्रीगंगानगर जिले की रायसिंहनगर तहसील के डाबला गांव से करीब एक किमी की दूरी पर करनीजी नहर के किनारे पर स्थित है शहीद नगर गुरुद्वारा बुढ़ाजोहड़। इस गुरुद्वारे का इतिहास 17वीं शताब्दी में मुगलकाल और संघर्ष से संबंधित है। 1731 ईस्वी में नादर शाह ने दिल्ली पर कब्जा कर दौलत लूटने के बाद पंजाब से होते हुए अफगानिस्तान लौटने के दौरान सिखों से संघर्ष किया।

जुल्म बढ़ने पर सन 1740 में इस स्थान पर सिखों के एक के जत्थे ने जत्थेदार बुढ़ा सिंहजी जेत्थेदारी में डेरा लगाया था। जत्थेदार बुढ़ा सिंह के नाम पर इस स्थान का नाम बुढ़ाजोहड़ रखा गया।



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