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विद्यार्थी जिन टॉपिक्स को शुरू से पढ़ते आ रहे उन्हें हटाया, ताकि प्रतियोगी परीक्षा में न हो दिक्कत

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जोधपुर7 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो।

  • वलयकार विधि से शामिल टॉपिक्स को हटाने में दी गई प्राथमिकता
  • पाठ्यक्रम निर्धारण करने में हुए विलम्ब से बच्चों पर बढ़ा बोझ
  • पहले से पढ़ चुके कई टॉपिक अब हो गए है पाठ्यक्रम से बाहर

कोरोना के कारण विद्यार्थियों के लिए लगातार बंद चल रही स्कूलों को ध्यान में रख राज्य सरकार ने पाठ्यक्रम में चालीस फीसदी की कटौती कर दी। पाठ्यक्रम में कटौती सीबीएसई पैटर्न पर की गई है। पाठ्यक्रम में कटौती करने में काफी विलम्ब होने के कारण शिक्षक असमंजस में पड़ गए है। कई ऐसे पाठ हटा दिए गए है जो वे ऑन लाइन पढ़ा चुके है। ऐसे में शिक्षक नया पाठ्यक्रम जारी होने के बाद इसकी विवेचना करने में जुटे है। शिक्षकों का मानना है कि वे ही पाठ हटाए गए है जो विद्यार्थी छोटी कक्षाओं से पढ़ते आ रहे थे या फिर ऐसे पाठ जिन्हें बच्चे स्वयं के स्तर पर पढ़ सके। ऐसे में उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं में ज्यादा दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े।

यह रहा टॉपिक्स हटाने का आधार
शिक्षाविद् डॉ. महेश शर्मा का कहना है कि पाठ्यक्रम का निर्धारण दो तरीके से होता है। एक होता है वलयकार और दूसरा होता है स्टैप बाई स्टैप। वलयकार में बच्चों को किसी विषय के बारे में हर साल धीरे-धीरे थोड़ा-थोड़ा पढ़ाते हुए दायरा बढ़ाया जाता है। उदाहरण के लिए छठी कक्षा से न्यूटन लॉ पढ़ाना शुरू कर दिया जाता है। इसके बाद प्रत्येक कक्षा से लेकर कॉलेज तक वे इसके बारे में पढ़ते है। ऐसे में साल दर साल के पाठ्यक्रम में इसका दायरा बढ़ता जाता है। वहीं स्टैप बाय स्टैप सिस्टम में हर वर्ष नए टॉपिक जोड़े जाते है। इन टॉपिक को विद्यार्थी साल दर साल पढ़ते हुए आगे बढ़ते है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि पाठ्यक्रम को देख लग रहा है कि वलयकार तरीके से जो टॉपिक बच्चे पहले से पढ़ते आ रहे थे उन्हें एक साल के लिए पाठ्यक्रम से हटाया गया है। कोरोना के कारण पाठ्यक्रम को कम करने के सिवाय कोई विकल्प ही नहीं था। इनमें से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए बच्चे आसानी से अपने स्तर पर भी इन पाठ को पढ़ सकेंगे। सीबीएसई में भी पाठ्यक्रम को इसी पैटर्न पर कम किया गया है। राजस्थान में भी केन्द्र के समान ही तरीका अपनाया गया है। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थान के बच्चों को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। जबकि जो टॉपिक बच्चे पहली बार पढ़ रहे है उन्हें बरकरार रखा गया है।
पसोपेश में शिक्षक
पाठ्यक्रम कटौती में हुए विलंब ने शिक्षकों को पसोपेश में डाल दिया है। ऑन लाइन चल रही कक्षाओं के माध्यम से वे कई ऐसे पाठ पहले से पढ़ा चुके है और अब उन्हें पूरी तरह से हटा दिया गया है। ऐसे में शिक्षक पूरे पाठ्यक्रम को नए सिरे समझने की मशक्कत में जुटे है। उनका कहना है कि यदि पाठ्यक्रम में कटौती समय रहते कर दी जाती तो बच्चों पर दोहरा भार नहीं पड़ता। कई टॉपिक वे पहले पढ़ चुके है, लेकिन अब उन्हें हटा दिया गया है। ऐसे में बच्चों की मेहनत बेकार चली गई।

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