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शहर की 67 साल पुरानी रामलीला पर कोरोना का साया, विरान दिख रहा है रंगमंच


सीकर18 मिनट पहले

श्राद्ध पक्ष के एक दिन बाद रामलीला के कलाकार अपनी तैयारियां प्रारंभ कर देते थे।

  • सांस्कृतिक मंडल के संयुक्त मंत्री जानकी प्रसाद इंदौरिया ने बताया इस बार संक्रमण के चलते संशय की स्थिति बनी हुई

शहर में इस बार कोरोना संक्रमण के चलते 67 साल पुरानी रामलीला में होने पर संशय के बादल छा गए है। श्राद्ध पक्ष के एक दिन बाद रामलीला के कलाकार अपनी तैयारियां प्रारंभ कर देते थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। इस बार रामलीला मैदान का रंगमंच सुना है। इस बार अधिकमास ने भी रामलीला को मौका मिल सकता है, लेकिन प्रशासन की गाइडलाइनों में तय नहीं होने के कारण ये असमंजस की स्थिति में है।

सांस्कृतिक मंडल के संयुक्त मंत्री जानकी प्रसाद इंदौरिया ने बताया इस बार संक्रमण के चलते संशय की स्थिति बनी हुई है। जहां एक महीने पहने तैयारियां प्रारंभ हो जाती थी, वहां वीराना छाई हुई है। ब्रिटिश शासन की समाप्ति एवं राजाओं के शासन का राज्य सरकारों में विलीनीकरण के बाद विलुप्त हुई सामाजिक गतिविधियों को पूर्नजीवित करने के प्रयास में गांवों, पंचायतों नगर पालिकाओं में रामलीला को प्रारंभ किया गया। सीकर में 1954 में रामलीला पतासों की गली में माजी साहब के कुएं के पास किया गया। लगभग 8 सालों के बाद बढ़ती लोगों की भीड़ के चलते राव राजा कल्याण सिंह दूसरे स्थान के लिए निवेदन किया, तब उन्होंन रामलीला मैदान में रंगमंच बनाने की घोषण की। इसके बाद रामलीला मैदान के मंच पर रामलीला के कलाकार का मंचन करते है।

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