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सुरजेवाला ने बताई मोदी सरकार के 6 साल में 6 भ्रांतिया, बोले- झूठ सरकार के कामकाज की पहचान बन गई

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  • दोपहर 12 बजे से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे वर्कशॉप चली, जिसमें गहलोत भी मौजूद रहे
  • सुरजेवाला ने कहा-भारत एक ऐसे मुकाम पर आकर खड़ा है, जहां देश के नागरिक सरकार द्वारा दी गई पीड़ा सहने को मजबूर

दैनिक भास्कर

Jun 13, 2020, 07:15 PM IST

जयपुर. राजस्थान में विधायकों की बाड़ेबंदी जारी है। शनिवार को चौथे दिन सभी विधायकों और मंत्रियों की वर्कशॉप हुई। इस वर्कशॉप में प्रवासी मजदूरों के संकट, कोरोना, लॉकडाउन, अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति, आजादी के बाद न्यूनतम जीडीपी दर, आय की असमानता किसान की आय दोगुनी करने के नाम पर छल, महंगाई और मोदी सरकार में असीम पीड़ा के छह साल आदि बिंदुओं पर चर्चा हुई। साथ ही विचार-विमर्श और सवाल-जवाब भी हुए।

 
दोपहर 12 बजे से शुरू होकर लगभग ढाई घंटे चली वर्कशॉप में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल, एआईसीसी महासचिव और राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, पर्यवेक्षक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय चीफ प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला मौजूद रहे। इस वर्कशॉप रणदीप सुरजेवाला द्वार संबोधित किया गया। जिसमें उन्होंने भाजपा सरकार के छ सालों में छ भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी।

सुरजेवाला ने कहा कि सातवें साल की शुरुआत में भारत एक ऐसे मुकाम पर आकर खड़ा है, जहां देश के नागरिक सरकार द्वारा दी गई पीड़ा सहने को मजबूर हैं। पिछले छः सालों में देश में भटकाव की राजनीति और झूठ मोदी सरकार के कामकाज की पहचान बन गई। दुर्भाग्यवश, भटकाव के इस आडंबर ने मोदी सरकार की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा तो किया, परंतु देश को भारी सामाजिक व आर्थिक क्षति पहुंचाई।

 
पहली भ्रांति: ‘विकास’ बनाम ‘मोदीनोमिक्स’ की वास्तविकता!
सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने सुशासन का अपना ब्रांड एक शब्द ‘विकास’ के बूते पर बेचा था। इस काल्पनिक विकास के लिए उन्होंने ‘60 साल बनाम 60 महीने’ का नारा लगाया। साल 2020 तक सभी वादों को पूरा करने के लिए मील का पत्थर स्थापित कर दिया गया। लेकिन आज सरकार के पास उपलब्धि के नाम पर दिखाने को क्या है?

2 करोड़ नौकरियां बनाम 27 प्रतिशत बेरोजगारी 

मोदी सरकार हर साल 2 करोड़ नौकरी देने के वादे के साथ सत्ता में आई। 2017-18 में भारत में पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर रही (6.1 प्रतिशत – शहरी भारत में 7.8 प्रतिशत और ग्रामीण भारत में 5.3 प्रतिशत)। कोविड के बाद भारत की बेरोजगारी दर अप्रत्याशित रूप से बढ़कर 27.11 प्रतिशत हुई।

मोदी सरकार के कार्यकाल में जीडीपी का मतलब हो गया है – ‘ग्रॉसली डिक्लाईनिंग परफॉर्मेंस’
कोविड-19 से बहुत पहले ही अर्थव्यवस्था बर्बादी के कगार पर पहुंच चुकी थी। पिछले 21 महीनों में जीडीपी वृद्धि दर में लगातार गिरावट हुई है। वित्तवर्ष 2020 की चौथी तिमाही में जीडीपी 3.1 प्रतिशत है, जो संशोधित हो 2 प्रतिशत तक ही रहने का अनुमान है।

बैंकों को चूना लगाया, भारत के खजाने को लूटा- सुरजेवाला
‘मोदी सरकार ने छः सालों में बैंकों के 6,66,000 करोड़ रु. के ‘लोन राईट ऑफ’ कर दिए (साल 2014-15 से सितंबर 2019)। 32,868 ‘बैंक फ्रॉड’ हुए जिनमें देश के खजाने को 2,70,513 करोड़ रु. का चूना लगा।’

दूसरी भ्रांति: ‘सबका साथ, सबका विकास’ बनाम ‘मित्रों का साथ, भाजपा का विकास’

मोदी सरकार के 6 साल में साबित हो गया है कि उनकी प्राथमिकता केवल अमीर मित्रों की तिजोरियां भरना है। चंद अमीरों से सरोकार और गरीब को दुत्कार ही सरकार का रास्ता बन गया है। जरूरतमंद एवं कमजोर वर्ग के लोगों को बेसहारा छोड़ दिया गया है।

  • भारत में ‘आय की असमानता’ 73 सालों में सबसे अधिक है। मोदी सरकार के चलते देश के केवल 1 प्रतिशत लोगों के पास देश की 45 प्रतिशत से अधिक दौलत है।
  • गांवों में गरीबी की दर 2017-18 में बढ़कर 30 प्रतिशत हो गई। कोविड-19 के लॉकडाउन के चलते लगभग 8 करोड़ प्रवासी मजदूर भारत के गांवों में लौटे हैं। सवाल यह है कि क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था उनका जीवनयापन कर सकेगी? 
  • मध्यम वर्ग/निम्न मध्यम वर्ग ‘गंभीर आर्थिक संकट’ में हैं।
  • एक तरफ देशवासी और गरीब होते जा रहे हैं, वहीं भाजपा की संपत्ति बहुत तेजी से बढ़ रही है। भाजपा की आय 2014-15 में 970 करोड़ रु. से बढ़कर 2019-20 में 2410 करोड़ रु. हो गई, यानि 248 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी।

 
तीसरी भ्रांति: ‘प्रधान सेवक’ बनाम ‘निरंकुश तानाशाह’
सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी साधारण पृष्ठभूमि के बारे में बार-बार बताते हैं। उनके 6 साल के कार्यकाल ने साबित कर दिया है कि उन्हें आम लोगों के दुख से कोई फर्क नहीं पड़ता। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि उनमें आम लोगों के प्रति जिम्मेदारी व जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है। 

प्रवासी मजदूरों के संकट ने मौजूदा सरकार की असंवेदनशीलता तथा नेतृत्व की विफलता को उजागर कर दिया है। कोविड-19 की महामारी के बीच 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को बिना खाने, पानी और आश्रय के सैकड़ों-हजारों किलोमीटर दूर स्थित अपने गांव को पैदल जाने को मजबूर होना पड़ा क्योंकि प्रधान सेवक ने उनकी दुर्दशा का संज्ञान तक लेने से इंकार कर दिया। चाहे नोटबंदी हो, जीएसटी हो या फिर कोविड लॉकडाउन, सारे फैसले एक व्यक्ति द्वारा लिए जा रहे हैं। इन सबका परिणाम देशवासियों के लिए विनाशकारी साबित हुआ है।

 
चौथी भ्रांति: किसान की आय ‘दोगुनी करना’ बनाम किसान से ‘छल’
मोदी सरकार के 6 साल किसान के साथ बार बार हुए छल की कहानी कहते हैं। मोदी सरकार ने ‘लागत+50 प्रतिशत मुनाफे’ के बराबर ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ देने। आय दोगुनी करने का वादा कर सत्ता पाई थी। मोदी सरकार ने 6 सालों में एक बार भी लागत+50 प्रतिशत मुनाफे के बराबर न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण नहीं किया। जिसका वादा उन्होंने ‘सी-2 फॉर्मूले’ के आधार पर अपने चुनावी घोषणापत्र में किया था। इसके विपरीत किसानों को अकेले रबी 2020 के सीज़न में 50,000 करोड़ रु. से अधिक का नुकसान हुआ है।

पांचवीं भ्रांति: ‘अच्छे दिन’ बनाम ‘सच्चे दिन’
सुरजेवाला ने कहा कि इससे पहले कभी भी कोई सरकार अपने नागरिकों के प्रति इतनी उदासीन व निर्दयी नहीं साबित हुई। भारत पूरे विश्व में लोकतंत्र की अनूठी मिसाल पेश करता आया है। मोदी सरकार की कार्यप्रणाली के चलते प्रजातंत्र का आधार ही खतरे में है। विदेशों से 80 लाख करोड़ रुपए का कालाधन वापस लाने और हर भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपए जमा कराने की बात भारत के राजनैतिक इतिहास का सबसे बड़ा झूठ साबित हुआ है। यह वादा पूरा करना तो दूर मोदी सरकार की नाक के नीचे से 2,70,000 करोड़ रुपए मूल्य का बैंक फ्रॉड हो गया। भगोड़े देश का पैसा लूटकर देश छोड़कर भागने में सफल हो गए। 6 साल बीत जाने के बाद भी एक भी भगोड़ा वापस नहीं लाया जा सका।

हंगर इंडैक्स एवं हैप्पीनेस इंडेक्स में तीव्र गिरावट
सुरजेवाला ने कहा कि ग्लोबल हंगर इंडैक्स में भारत 117 देशों की सूची में गिरकर 102 वें पायदान पर खिसक गया है। हैप्पीनेस इंडैक्स में भारत 2013 में 117 रैंक पर था। 2019 में भारत 155 देशों में से गिरकर 140वीं रैंक पर पहुंच चुका है। मोदी सरकार के 6 सालों में जातीय एवं सांप्रदायिक हिंसा में भारी वृद्धि हुई। सहानुभूति, भाईचारे की भावना तार तार हो गई।
 
छठवीं भ्रांति: मजबूत नेतृत्व बनाम बेतुके निर्णय
सबसे आखिर में सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार के 6 साल में राजनैतिक महत्वाकांक्षा के लिए लगातार राष्ट्रहित के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मोदी सरकार के 6 सालों में हमारे जवानों की शहादत में लगभग 110 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। उरी आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर, पठानकोट एयर बेस और नगरोटा आर्मी बेस आदि प्रमुख रक्षा संस्थानों और अमरनाथ यात्रा पर आतंकियों द्वारा बार-बार हमले किए गए। दिशाहीन सरकार देखती रह गई। पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। आज तक इस रहस्य से भी पर्दा नहीं उठा कि पुलवामा हमले के समय व उसके बाद प्रधानमंत्री जिम कॉर्बेट पार्क में फिल्म की शूटिंग क्यों करते रहे। सभी सुरक्षा एजेंसियों का प्रधानमंत्री से संपर्क कैसे टूट गया था।

हमारी सेना के शौर्य का राजनैतिक लाभ लेने के लिए सदैव तत्पर रहने वाली मौजूदा सरकार ने रक्षा बजट में ही कटौती कर दी। साल 2020-21 के बजट में रक्षा मामलों के लिए केवल जीडीपी का 1.58 प्रतिशत दिया गया है। जो साल 1962 के बाद सबसे कम राशि है। कोविड की महामारी के बाद तो इस बजट को और काट दिया गया है।

नागरिकों के खिलाफ युद्ध लड़ रही सरकार

सुरजेवाला ने कहा कि 6 साल का लंबा अरसा पूरा होने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे मोदी सरकार अपने ही नागरिकों के खिलाफ युद्ध लड़ रही हो। मरहम लगाने की बजाय घाव दे रही हो। यह यकीनन आश्चर्यजनक है। सरकार ने प्रजातंत्र के संचालन का सबक आज तक भी नहीं सीखा। सरकारें नागरिकों की बात सुनने, सुरक्षा करने, संरक्षण देने व सेवा के लिए हैं। न कि गुमराह करने, भटकाने व बांटने के लिए। जितना जल्दी मौजूदा सरकार को यह बात समझ में आ जाएगी, उतना जल्दी ही सरकार को इतिहास के पन्नों में अपनी भूमिका समझ आएगी।

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